धतूरा: भगवान शिव को चढ़ाया जाने वाला पौधा कितना खतरनाक? शरीर के नर्वस सिस्टम पर ऐसे करता है असर

नई दिल्ली। सावन और महाशिवरात्रि जैसे मौकों पर भगवान शिव की पूजा में धतूरे का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। कई जगह भक्त धतूरे के फल और फूल शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। लेकिन धार्मिक आस्था से अलग इसका एक दूसरा पहलू भी है, जिसे नजरअंदाज करना गंभीर नुकसान का कारण बन सकता है। धतूरा एक विषैला पौधा है और इसके अलग-अलग हिस्सों में ऐसे रासायनिक यौगिक पाए जाते हैं जो शरीर के नर्वस सिस्टम और दिल की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं।

हाल ही में धतूरे की बिक्री को लेकर कर्नाटक में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की कार्रवाई के बाद यह पौधा फिर चर्चा में आया। अधिकारियों ने धतूरे के फल और बीज को खाद्य पदार्थ के रूप में बेचने पर आपत्ति जताई और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई की।

धतूरा आखिर क्या है?

धतूरा (Datura) पौधों का एक समूह है, जिसे अंग्रेजी में Thorn Apple या Jimsonweed जैसे नामों से भी जाना जाता है। यह Solanaceae यानी नाइटशेड परिवार से संबंधित है। इसकी पहचान अक्सर बड़े आकार के तुरही जैसे फूल और कांटेदार फल से होती है।

भारत में इसे धार्मिक परंपराओं के कारण भी काफी लोग पहचानते हैं। हालांकि, इसका धार्मिक इस्तेमाल और इसे खाने के लिए सुरक्षित मानना—दो बिल्कुल अलग बातें हैं।

वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार धतूरे में atropine, scopolamine और hyoscyamine जैसे tropane alkaloids पाए जाते हैं। ये शरीर में acetylcholine नामक न्यूरोट्रांसमीटर की सामान्य गतिविधि को बाधित करते हैं। यही वजह है कि धतूरे के सेवन के बाद शरीर के कई अनैच्छिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

नर्वस सिस्टम को कैसे प्रभावित करता है धतूरा?

हमारे शरीर का nervous system लगातार अलग-अलग अंगों को संकेत भेजता रहता है। इन संकेतों में acetylcholine की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह हृदय की गति, आंखों की पुतलियों, पाचन, पसीना आने और कई दूसरे शारीरिक कार्यों को नियंत्रित करने में मदद करता है।

धतूरे में मौजूद tropane alkaloids muscarinic receptors को block कर सकते हैं। इसका परिणाम शरीर में anticholinergic toxicity के रूप में दिखाई दे सकता है।

इसी कारण विषाक्तता की स्थिति में व्यक्ति को मुंह और त्वचा में अत्यधिक सूखापन, आंखों की पुतलियां फैलना, तेज धड़कन, धुंधला दिखाई देना, भ्रम और असामान्य मानसिक स्थिति जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

गंभीर मामलों में व्यक्ति वास्तविकता और कल्पना के बीच अंतर करने में असमर्थ हो सकता है। उसे hallucinations, delirium या अत्यधिक बेचैनी का सामना करना पड़ सकता है।

धतूरा खाने के बाद क्या लक्षण दिखाई दे सकते हैं?

धतूरे की विषाक्तता के लक्षण व्यक्ति और संपर्क की मात्रा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। मेडिकल साहित्य में इसके कई विशिष्ट लक्षण बताए गए हैं।

इनमें प्रमुख हैं:

  • मुंह और गले में अत्यधिक सूखापन
  • आंखों की पुतलियों का फैलना
  • धुंधला दिखाई देना या रोशनी से परेशानी
  • दिल की धड़कन तेज होना
  • त्वचा का गर्म और सूखा होना
  • बेचैनी और भ्रम
  • बोलने या व्यवहार में असामान्य बदलाव
  • hallucinations
  • delirium यानी गंभीर मानसिक भ्रम
  • पेशाब करने में परेशानी
  • शरीर का तापमान बढ़ना

गंभीर विषाक्तता में दौरे, बेहोशी, सांस लेने में समस्या और coma जैसी जानलेवा स्थितियां भी पैदा हो सकती हैं।

सबसे खतरनाक बात: नशे जैसा असर समझ लेना

धतूरे को लेकर एक खतरनाक भ्रम यह है कि इसके कारण होने वाली hallucinations को कुछ लोग “नशे” या किसी आध्यात्मिक अनुभव के रूप में देख सकते हैं। वास्तव में यह शरीर पर जहरीले प्रभाव का संकेत हो सकता है।

धतूरे के alkaloids मस्तिष्क के neurotransmitter signalling को प्रभावित करते हैं। परिणामस्वरूप व्यक्ति को ऐसी चीजें दिखाई या सुनाई दे सकती हैं जो वास्तव में मौजूद नहीं हैं। वह अपने आसपास के लोगों और परिस्थितियों को गलत समझ सकता है।

यही कारण है कि धतूरे की विषाक्तता में व्यक्ति अपने व्यवहार पर नियंत्रण भी खो सकता है। मेडिकल रिपोर्ट्स में agitation, confusion और delirium जैसे neurological symptoms दर्ज किए गए हैं।

क्या धतूरे का हर हिस्सा जहरीला होता है?

धतूरे के पौधे के अलग-अलग हिस्सों में toxic alkaloids मौजूद हो सकते हैं। इसलिए केवल बीज को खतरनाक और बाकी हिस्सों को सुरक्षित मानना सही नहीं है। वैज्ञानिक साहित्य में धतूरे के पौधे के विभिन्न हिस्सों से toxicity की रिपोर्ट सामने आई है।

एक और समस्या यह है कि पौधे में मौजूद विषैले रसायनों की मात्रा हमेशा समान नहीं होती। इसलिए किसी व्यक्ति के लिए “इतनी मात्रा सुरक्षित होगी” जैसी गणना करना बेहद जोखिम भरा है।

यानी धतूरे को देखकर उसकी विषाक्तता का अनुमान लगाना संभव नहीं है।

धार्मिक परंपरा और वैज्ञानिक सावधानी में अंतर समझना जरूरी

भारत में धतूरे का धार्मिक महत्व पुराना है। भगवान शिव को धतूरा अर्पित करने की परंपरा कई क्षेत्रों में देखने को मिलती है। लेकिन पूजा में किसी वस्तु का इस्तेमाल होने का मतलब यह नहीं है कि वह खाने के लिए सुरक्षित भी है।

धार्मिक अनुष्ठान में धतूरा अर्पित करना और उसे निगलना दो अलग-अलग बातें हैं। विशेष रूप से बच्चों को इसके फल या बीज से दूर रखना जरूरी है, क्योंकि वे इसकी विषाक्तता को समझे बिना इसे सामान्य फल समझ सकते हैं।

ऑनलाइन बिक्री ने क्यों बढ़ाई चिंता?

अगस्त 2026 में कर्नाटक में धतूरे की ऑनलाइन बिक्री को लेकर खाद्य सुरक्षा कार्रवाई ने इस समस्या को नया संदर्भ दिया। रिपोर्टों के अनुसार अधिकारियों ने Amazon, Swiggy Instamart और BigBasket से जुड़े धतूरे के खाद्य listings पर कार्रवाई की और इन्हें मानव उपभोग के लिए बेचे जाने पर रोक लगाने के निर्देश दिए।

यह मामला सिर्फ एक पौधे की toxicity तक सीमित नहीं है। इससे यह सवाल भी सामने आता है कि ऑनलाइन marketplaces पर ऐसे उत्पादों की पहचान और classification कितनी महत्वपूर्ण है, जिन्हें सामान्य खाद्य पदार्थ समझकर कोई व्यक्ति खरीद सकता है।

गलती से धतूरा खा लिया तो क्या करें?

अगर किसी व्यक्ति ने गलती से धतूरे का कोई हिस्सा खा लिया है और उसके बाद असामान्य व्यवहार, तेज धड़कन, आंखों की पुतलियां फैलना, अत्यधिक बेचैनी, भ्रम, hallucination या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो इसे सामान्य पेट खराब होने की समस्या समझकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए।

तुरंत नजदीकी emergency medical facility से संपर्क करें।

व्यक्ति को खुद से उल्टी कराने या घरेलू नुस्खों से इलाज करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अस्पताल में डॉक्टर लक्षणों और मरीज की स्थिति के आधार पर supportive treatment और आवश्यक toxicology management करते हैं। गंभीर poisoning में prompt medical treatment महत्वपूर्ण हो सकता है।

धतूरे को लेकर सबसे जरूरी संदेश

धतूरा देखने में सामान्य पौधा हो सकता है, धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण भी हो सकता है, लेकिन इसे खाद्य पदार्थ समझना गंभीर गलती हो सकती है।

इसमें मौजूद atropine, scopolamine और अन्य tropane alkaloids शरीर के nervous system के सामान्य signalling को बाधित कर सकते हैं। इसके परिणाम मामूली लक्षणों से लेकर गंभीर neurological और cardiovascular complications तक हो सकते हैं।

इसलिए पूजा-पद्धति और चिकित्सा विज्ञान को अलग-अलग संदर्भ में समझना जरूरी है। भगवान शिव को अर्पित किए जाने वाले धतूरे को खाने या औषधि के रूप में खुद से इस्तेमाल करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

Disclaimer: यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। धतूरे के सेवन या विषाक्तता की आशंका होने पर घरेलू उपचार के बजाय तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें।

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