H1N1, कोविड या टाइफाइड? शुरुआत में पहचानना मुश्किल, जानें कब कौन-सा टेस्ट जरूरी

मौसम में बदलाव के साथ इन दिनों बुखार, बदन दर्द, खांसी और थकान जैसी शिकायतें आम हो गई हैं। परेशानी तब बढ़ जाती है जब H1N1, कोविड-19 और टाइफाइड जैसे संक्रमणों के मामले एक साथ सामने आने लगते हैं। इन बीमारियों के शुरुआती लक्षण काफी हद तक एक जैसे हो सकते हैं, जिसके कारण मरीज के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि आखिर उसे कौन-सा संक्रमण हुआ है। इसी विषय पर कैलाश दीपक अस्पताल की कंसल्टेंट फिजिशियन डॉ. मानसी निगम ने जरूरी जानकारी साझा की है।
शुरुआती दिनों में क्यों होती है उलझन?
डॉ. मानसी के मुताबिक, H1N1, कोविड-19 और टाइफाइड की शुरुआत तेज बुखार, सिरदर्द, थकान और शरीर में दर्द जैसे सामान्य लक्षणों से हो सकती है। H1N1 और कोविड-19 में खांसी, गले में खराश और सांस से जुड़ी परेशानियां भी दिखाई दे सकती हैं। वहीं टाइफाइड की शुरुआत बुखार और दूसरे सामान्य लक्षणों से हो सकती है। ऐसे में केवल लक्षणों के आधार पर शुरुआती चरण में बीमारी की सही पहचान करना आसान नहीं होता।
क्या कोई खास लक्षण बीमारी की पहचान कर सकता है?
इन तीनों संक्रमणों में ऐसा कोई एक लक्षण नहीं है, जिससे शुरुआत में निश्चित रूप से पता चल सके कि मरीज को H1N1, कोविड या टाइफाइड है। इसलिए केवल अपने लक्षणों के आधार पर बीमारी का अनुमान लगाकर इलाज शुरू करना सही नहीं है। डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, लक्षणों की अवधि और स्थिति को देखकर जरूरी जांच की सलाह देते हैं।
किस बीमारी के लिए कौन-सा टेस्ट?
H1N1 और कोविड-19 की जांच के लिए RT-PCR जैसे मॉलिक्यूलर टेस्ट इस्तेमाल किए जा सकते हैं। रेस्पिरेटरी सैंपल बीमारी की शुरुआत में लिया जाना महत्वपूर्ण हो सकता है। दूसरी ओर, टाइफाइड की पुष्टि के लिए ब्लड कल्चर को अहम जांच माना जाता है। हालांकि, हर मरीज के लिए एक ही टेस्ट या जांच कराने का निश्चित समय तय नहीं किया जा सकता। इसका फैसला डॉक्टर मरीज की स्थिति देखकर करते हैं।
Widal टेस्ट को लेकर सावधानी
टाइफाइड के शक में कई लोग बीमारी के शुरुआती एक-दो दिनों में Widal टेस्ट करा लेते हैं और पॉजिटिव रिपोर्ट को पक्का प्रमाण मान लेते हैं। लेकिन केवल Widal टेस्ट के आधार पर टाइफाइड की पुष्टि नहीं की जा सकती। क्लिनिकल हिस्ट्री और अन्य जांचों को भी ध्यान में रखना जरूरी होता है। सिर्फ रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर खुद से एंटीबायोटिक शुरू करना उचित नहीं है।
क्या हर मरीज को मल्टीप्लेक्स पैनल चाहिए?
हर बुखार या फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीज के लिए महंगा रेस्पिरेटरी मल्टीप्लेक्स पैनल टेस्ट जरूरी नहीं होता। ये जांच एक साथ कई संक्रमणों की पहचान कर सकती हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल मरीज की स्थिति और डॉक्टर की सलाह के आधार पर किया जाता है। केवल इसलिए कि एक समय में कई संक्रमण फैल रहे हैं, हर व्यक्ति को यह टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती।
बिना सलाह एंटीबायोटिक लेना क्यों गलत?
बुखार आते ही एजिथ्रोमाइसिन या एमोक्सिसिलिन जैसी एंटीबायोटिक्स लेना सही तरीका नहीं है। हर बुखार बैक्टीरियल संक्रमण की वजह से नहीं होता। H1N1 और कोविड-19 जैसे वायरल संक्रमणों पर एंटीबायोटिक्स काम नहीं करतीं। बिना जरूरत इनके इस्तेमाल से साइड इफेक्ट्स के साथ एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए इन्हें डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए।
H1N1 में एंटीवायरल कब शुरू होती है?
अगर डॉक्टर को H1N1 का संदेह हो, तो ओसेल्टामिविर जैसी एंटीवायरल दवा बीमारी के शुरुआती 48 घंटों में सबसे ज्यादा प्रभावी हो सकती है। हालांकि गंभीर या हाई-रिस्क मरीजों में 48 घंटे बाद भी इसका फायदा हो सकता है। इसलिए ऐसे मरीजों को मेडिकल सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।
किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर बुखार या सांस से जुड़ी बीमारी के दौरान हालत बिगड़ रही हो, तो टेस्ट रिपोर्ट का इंतजार नहीं करना चाहिए। सांस लेने में परेशानी या सांस फूलना, सीने में दर्द, भ्रम या बेहोशी, अत्यधिक कमजोरी, लगातार बढ़ती खांसी या लंबे समय तक बना रहने वाला बुखार गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत मेडिकल मदद लेना जरूरी है।
बुजुर्गों, छोटे बच्चों और डायबिटीज या अस्थमा जैसी समस्याओं वाले लोगों को संक्रमण के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इन लोगों में बीमारी गंभीर होने का जोखिम अधिक हो सकता है। इसलिए लक्षण बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
मौसमी बुखार में सबसे जरूरी बात यह है कि घबराने के बजाय सही कदम उठाया जाए। हर बुखार H1N1, कोविड या टाइफाइड नहीं होता। खुद से दवा लेने के बजाय लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और जोखिम को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर की सलाह से सही जांच और उपचार कराना चाहिए।
