सिर्फ क्या खाते हैं नहीं, कब खाते हैं यह भी मायने रखता है; देर रात स्नैकिंग से क्यों बिगड़ सकती है सेहत?

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। देर रात तक काम करना, स्क्रीन पर समय बिताना और सोने से पहले कुछ खाने की आदत आज कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी है। ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं रह जाता कि हम क्या खा रहे हैं, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि कब, कितना और किस परिस्थिति में खा रहे हैं।

डॉ. शुभदा भनोट, चीफ डायबिटीज एजुकेटर, मैक्स हेल्थकेयर, नई दिल्ली के अनुसार, भोजन का समय शरीर की जैविक घड़ी और metabolic processes के साथ जुड़ा होता है। हालांकि, किसी एक समय पर खाना अकेले मोटापे या डायबिटीज का कारण नहीं माना जा सकता।

शरीर की जैविक घड़ी से जुड़ा है खान-पान

हमारे शरीर में 24 घंटे की एक biological clock होती है, जिसे circadian rhythm कहा जाता है। यह नींद-जागने के चक्र के अलावा भूख, hormones, glucose metabolism और energy regulation जैसी प्रक्रियाओं को भी प्रभावित करती है।

दिन और रात के दौरान शरीर की metabolic response में स्वाभाविक बदलाव आते हैं। इसी वजह से एक जैसा भोजन अलग-अलग समय पर शरीर को थोड़ा अलग metabolic response दे सकता है।

देर रात खाने से क्या परेशानी हो सकती है?

सोने के बिल्कुल करीब भारी भोजन या हाई-कैलोरी स्नैक लेने से कुछ लोगों में acidity, bloating और discomfort बढ़ सकता है। खाने के तुरंत बाद लेटने से acid reflux की समस्या भी बढ़ सकती है।

देर रात खाने की आदत का एक दूसरा पहलू भी है। अगर दिन में भोजन के बीच बहुत लंबा अंतर हो जाए, तो रात तक अत्यधिक भूख लग सकती है। इसके बाद व्यक्ति जरूरत से ज्यादा portion खा सकता है या calorie-dense snacks चुन सकता है।

मेटाबॉलिक हेल्थ पर क्या असर?

टीवी या मोबाइल देखते हुए चिप्स, बिस्कुट, नमकीन, मिठाई या sugary drinks लेने की आदत कुल calorie intake बढ़ा सकती है।

अगर यह routine लंबे समय तक बना रहे और physical activity या sleep भी खराब हो, तो वजन बढ़ने और cardiometabolic risk factors से इसका संबंध हो सकता है।

लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि देर रात खाना अकेले obesity या diabetes का कारण है। कुल calories, भोजन की quality, physical activity, sleep, stress और genetics भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भूख के हार्मोन भी होते हैं प्रभावित

भूख और तृप्ति को नियंत्रित करने वाली कई biological processes नींद और circadian rhythm से जुड़ी होती हैं।

Leptin शरीर को energy stores और satiety से जुड़े signals देने में भूमिका निभाता है, जबकि ghrelin hunger regulation में शामिल है। नींद की कमी और अनियमित sleep schedule appetite और food cravings को प्रभावित कर सकते हैं।

इसी तरह cortisol शरीर के stress response का महत्वपूर्ण hormone है और इसका secretion भी circadian rhythm के अनुसार बदलता है। लगातार stress और खराब नींद इस rhythm को प्रभावित कर सकते हैं।

हालांकि, इन hormones को अकेले वजन बढ़ने का कारण मानना सही नहीं होगा।

पेट की चर्बी और insulin resistance

पेट के आसपास जमा visceral fat metabolic health के लिए महत्वपूर्ण risk factor माना जाता है। अधिक visceral fat insulin resistance से जुड़ा हो सकता है, जिससे शरीर के लिए blood glucose को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।

इसीलिए सिर्फ late-night snacking पर ध्यान देने के बजाय पूरे lifestyle को देखना जरूरी है।

रात में भूख लगे तो क्या करें?

कभी-कभार रात में भूख लगने पर snack लेने की जरूरत हो सकती है। समस्या तब बनती है जब बिना भूख के रोजाना high-calorie snacks लेने की आदत बन जाए।

ऐसी स्थिति में:

  • सोने के बहुत करीब भारी भोजन से बचें।
  • रात के snacks की portion size पर ध्यान दें।
  • sugary drinks और अत्यधिक processed snacks को सीमित करें।
  • दिन में पर्याप्त और balanced meals लें।
  • देर रात तक screen पर जागने की आदत कम करें।
  • नियमित sleep schedule बनाए रखने की कोशिश करें।

निष्कर्ष: स्वस्थ खान-पान सिर्फ food choices की बात नहीं है। भोजन का समय, portion size, नींद, physical activity और stress management—ये सभी मिलकर metabolic health को प्रभावित करते हैं।

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