प्रशिक्षण या ‘पतियों की पंचायत’? जिला पंचायत के कार्यक्रम में नियमों की खुली अनदेखी!


राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत सोमवार को सोनभद्र के चोपन विकासखंड सभागार में पंचायत विकास योजना (PDP) और ई-ग्राम स्वराज विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विकासखंड की 36 ग्राम पंचायतों के पंचायत सहायकों और पंचायत सचिवों ने हिस्सा लिया।

प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार करने, ग्राम सभाओं के प्रभावी संचालन, ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाने, योजनाओं की प्राथमिकता तय करने, वित्तीय प्रबंधन और ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के बेहतर उपयोग की जानकारी देना था। अधिकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के बेहतर समन्वय के जरिए गांवों के विकास को गति देने पर जोर दिया।

पंचायत सहायकों ने उठाए गंभीर सवाल

प्रशिक्षण में शामिल पंचायत सहायक अंकित कुमार ने दावा किया कि कई ग्राम पंचायतों में नियमों के अनुसार ग्राम सभा आयोजित किए बिना ही विकास योजनाएं तैयार कर ली जाती हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी ग्राम पंचायत विकास योजना से पहले विधिवत ग्राम सभा आयोजित होना और आवश्यक कोरम पूरा होना अनिवार्य है। यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बैठक की कार्यवाही, फोटो, तिथि और समय का रिकॉर्ड इसकी पुष्टि कर सकता है।

अंकित कुमार ने बताया कि ग्राम पंचायत की कार्ययोजना तैयार करने की मुख्य जिम्मेदारी ग्राम सचिव और ग्राम प्रधान की होती है, जबकि पंचायत सहायक उनके निर्देशन में कार्य करता है। ऐसे में यदि सचिव प्रशिक्षण में शामिल न हों या ग्राम सभाओं के संचालन में सक्रिय भूमिका न निभाएं, तो प्रशिक्षण में मिली जानकारी को जमीन पर लागू करना मुश्किल हो जाता है।

मानदेय और भत्ते का मुद्दा भी उठा

पंचायत सहायकों ने प्रशिक्षण के दौरान अपने मानदेय और सुविधाओं का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि वर्तमान में उन्हें केवल 6,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। साथ ही नियुक्ति के बाद कई प्रशिक्षणों में भाग लेने के बावजूद आज तक यात्रा भत्ता नहीं दिया गया है। पंचायत सहायकों ने सरकार से मानदेय बढ़ाने और लंबित भत्तों का भुगतान करने की मांग की।

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