क्या यूरोलॉजी की समस्याएं सिर्फ पुरुषों और बुजुर्गों को होती हैं? डॉक्टर से जानिए 5 आम मिथकों की सच्चाई

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। यूरिनरी सिस्टम और किडनी से जुड़ी समस्याओं को लेकर लोगों के बीच कई तरह की गलतफहमियां मौजूद हैं। अक्सर यूरोलॉजी को पुरुषों और खासकर बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता है, जबकि यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI), किडनी स्टोन, पेशाब से जुड़ी दिक्कतें और ब्लैडर की समस्याएं अलग-अलग उम्र और लिंग के लोगों को प्रभावित कर सकती हैं।
समस्या यह है कि कई लोग शर्म या जानकारी की कमी के कारण शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। आइए जानते हैं यूरोलॉजिकल हेल्थ से जुड़े कुछ आम मिथकों की सच्चाई।
मिथक 1: यूरोलॉजिकल समस्याएं सिर्फ पुरुषों को होती हैं
सच: यूरोलॉजी सिर्फ पुरुषों की स्वास्थ्य समस्याओं तक सीमित नहीं है। महिलाओं को भी UTI, किडनी स्टोन, पेशाब पर नियंत्रण न रहना और ब्लैडर से जुड़ी अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
प्रोस्टेट से जुड़ी बीमारियां पुरुषों में जरूर महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यूरोलॉजिस्ट की जरूरत केवल पुरुषों को ही पड़ती है।
मिथक 2: यूरोलॉजिकल समस्याएं सिर्फ बुजुर्गों में होती हैं
सच: उम्र बढ़ने के साथ कुछ समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है, लेकिन यूरोलॉजिकल परेशानी किसी भी उम्र में हो सकती है।
UTI और किडनी स्टोन जैसी समस्याएं युवाओं और वयस्कों में भी देखी जाती हैं। इसलिए उम्र को समस्या को नजरअंदाज करने का कारण नहीं बनाना चाहिए।
मिथक 3: क्रैनबेरी जूस UTI को ठीक कर देता है
सच: यह दावा पूरी तरह सही नहीं है। कुछ अध्ययनों में क्रैनबेरी उत्पादों से बार-बार होने वाले UTI के जोखिम को कम करने की संभावना देखी गई है, लेकिन यह मौजूदा UTI का इलाज नहीं है।
अगर पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब आना, पेट के निचले हिस्से में दर्द या अन्य लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
मिथक 4: 50 साल के बाद ही यूरोलॉजिस्ट के पास जाना चाहिए
सच: डॉक्टर से मिलने के लिए किसी निश्चित उम्र का इंतजार करने की जरूरत नहीं है।
अगर कम उम्र में भी बार-बार UTI, पेशाब में खून, पेशाब करने में परेशानी, पेल्विक दर्द, किडनी स्टोन या लगातार पेशाब संबंधी समस्या हो रही है, तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
मिथक 5: लंबे समय तक पेशाब रोकना बिल्कुल सुरक्षित है
सच: कभी-कभार मजबूरी में पेशाब रोकना और लगातार आदत बना लेना एक बात नहीं है। लंबे समय तक या बार-बार पेशाब रोकने से ब्लैडर पर दबाव और असहजता बढ़ सकती है।
अगर पेशाब करने में परेशानी, ब्लैडर पूरी तरह खाली न होने का एहसास, दर्द या बार-बार पेशाब संबंधी समस्या हो रही है, तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।
किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?
यूरिनरी सिस्टम से जुड़े कुछ लक्षणों पर खास ध्यान देना चाहिए, जैसे:
- पेशाब में खून आना
- पेशाब करते समय दर्द या जलन
- बार-बार या अचानक पेशाब लगना
- पेशाब करने में परेशानी
- कमर या पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द
- बार-बार UTI होना
- पेशाब पूरी तरह न निकलने का एहसास
इनमें से कोई लक्षण लगातार बना रहे या गंभीर हो, तो खुद इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
यूरोलॉजिकल हेल्थ किसी एक उम्र या जेंडर तक सीमित नहीं है। सही जानकारी और समय पर जांच कई समस्याओं को गंभीर होने से पहले पहचानने में मदद कर सकती है।
